जगन्नाथ पुरी से स्वाभिमान का संदेश: शिवाजी जयंती पर मराठा पराक्रम और सनातन आस्था का उल्लेख
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शिवाजी जयंती पर जगन्नाथ पुरी से संबोधन.
मराठा पराक्रम और स्वराज्य का उल्लेख.
आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव पर जोर.
Bhubaneshwar / जगन्नाथ पुरी से एक भावनात्मक और ऐतिहासिक संदर्भ जुड़ा वक्तव्य सामने आया है, जिसमें हिंदू आस्था, स्वाभिमान और मराठा पराक्रम को स्मरण किया गया। वक्ता ने कहा कि इतिहास के एक दौर में मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा श्री जगन्नाथ महाप्रभु की पवित्र यात्रा पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, हिंदवी स्वराज्य के तेजस्वी मराठों ने उस आस्था की ज्योति को फिर से प्रज्वलित किया और धार्मिक परंपराओं को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर जगन्नाथ पुरी की पावन भूमि से संबोधन करते हुए वक्ता ने इसे व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि हिंदू स्वाभिमान का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि जिस मार्ग को तोड़कर भक्ति की धारा को रोकने की कोशिश की गई थी, उसी मार्ग पर मराठों ने एक ऐतिहासिक सेतु का निर्माण कर यह संदेश दिया कि सनातन परंपरा को कोई शक्ति रोक नहीं सकती। इस निर्माण को यूनेस्को द्वारा मान्यता मिलने का भी उल्लेख किया गया।
वक्तव्य में “कटक से अटक तक” के उद्घोष का जिक्र करते हुए कहा गया कि ओडिशा का कटक केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि हिंदू सामर्थ्य और स्वराज्य के विस्तार का प्रतीक है। जगन्नाथ नगरी से यह संदेश दिया गया कि आस्था पर हुए आघात के बावजूद स्वाभिमान का शंखनाद सदैव गूंजता रहेगा।